गोवा का हेल्थ सिस्टम ध्वस्त, पंजाब से सीख लेकर 10 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस दें सीएम- केजरीवाल

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Goa's health system has collapsed

- पंजाब की तरह बिना शर्त गोवा के हर परिवार को लाभ दिया जाए, जिसमें सारी बीमारियां कवर हों- केजरीवाल

- पैनल्ड प्राइवेट अस्पतालों का भुगतान 15 दिनों में करें, ताकि वे मरीजों के इलाज से इन्कार न करें- केजरीवाल

- मंत्रियों-अमीरों की तरह गोवा का सबसे गरीब व्यक्ति भी अच्छे से अच्छे अस्पताल में इलाज कराने का हकदार है- केजरीवाल

- गोवा का एकमात्र सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जीएमसी मंे भीड़ ज्यादा है, बिना सिफारिश बेड नहीं मिलता- केजरीवाल

- डीडीएसएसवाई से गोवावासियों का मोह भंग, 2.91 लाख परिवारों में से 1.81 लाख ने कार्ड का इस्तेमाल बंद किया- केजरीवाल

- साउथ गोवा जिला अस्पताल में 193 पद खाली हैं, तो पोंडा के आईडी अस्पताल में मेडिकल उपकरण तक नहीं हैं- केजरीवाल

नई दिल्ली, 04 जुलाई 2026 : Goa's health system has collapsed, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब सरकार से सीख लेकर गोवा के मुख्यमंत्री को भी अपने राज्य के लोगों को 10 लाख रुपए का हेल्थ इंश्योरेंस देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बिना शर्त हर परिवार को 10 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस दे रही है। उसी तरह गोवा के हर परिवार को भी दिया जाए और सारी बीमारियों को कवर किया जाए। साथ ही, पंजाब की तरह गोवा में पैनल्ड प्राइवेट अस्पतालों का भुगतान 15 दिनों में करें, ताकि अस्पताल मरीजों के इलाज से इन्कार न करें। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और अमीरों की तरह गोवा का सबसे गरीब व्यक्ति भी अच्छे से अच्छे अस्पताल में इलाज कराने का हकदार है और यही आदर्श स्थिति है।

अरविंद केजरीवाल ने गोवा के जर्जर स्वास्थ्य मॉडल को सामने रखते हुए कहा कि गोवा का पूरा हेल्थ सिस्टम ध्वस्त हो चुका है। हालात ये हैं कि गोवा का एकमात्र सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भारी भीड़ है और बिना सिफारिश के बेड नहीं मिलते हैं। जबकि साउथ गोवा जिला अस्पताल में 193 पद खाली हैं, तो पोंडा के आईडी अस्पताल में मेडिकल उपकरण नही तक नहीं हैं। सरकार ने डीडीएसएसवाई योजना जरूर चलाई, लेकिन इससे गोवावासियों का मोह भंग हो चुका है। कुल 2.91 लाख परिवारों के कार्ड बने थे, लेकिन इसमें से 1.81 लाख परिवारों ने कार्ड का इस्तेमाल बंद कर दिया है। आज 90 फीसद लोग गंभीर बीमारी होने पर प्राइवेट अस्पताल का खर्च नहीं उठा सकते।

“आप” के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गोवा की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। गोवा में दो तरह की स्वास्थ्य सेवाएं हैं। पहली, एक प्राइवेट और दूसरी सरकारी। अगर कोई गंभीर बीमारी हो जाए, तो लगभग 90 फीसद गोवा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर करता है। प्राइवेट स्वास्थ्य सेवाएं इतनी ज्यादा महंगी हैं कि 90 फीसद आबादी गंभीर बीमारी होने पर प्राइवेट अस्पतालों में अपना इलाज कराने का खर्च नहीं उठा सकती। सामान्य सर्दी, खांसी या बुखार के लिए लोग शायद प्राइवेट डॉक्टर के पास चले जाते हों, लेकिन अगर कोई गंभीर सर्जरी या बीमारी हो, तो कोई भी प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने की हिम्मत नहीं कर सकता। अगर हम मान लें कि गोवा की आबादी 18 लाख है, तो लगभग 16 लाख लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं और केवल 2 लाख लोग ही प्राइवेट अस्पतालों का खर्च उठा सकते हैं और शायद 2 लाख भी बहुत बड़ा आंकड़ा है।

अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि प्राइवेट अस्पताल बहुत सारे हैं, लेकिन सरकारी क्षेत्र में केवल एक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जीएमसी है। जीएमसी की हालत बहुत खराब है, वहां जरूरत से ज्यादा भीड़ होती है। अगर वहां बेड चाहिए, तो किसी की सिफारिश लगानी पड़ती है। डॉक्टर के पास जाओ तो वे दवाइयां लिख देते हैं, जिन्हें बाहर से खरीदना पड़ता है। दवाइयां महंगी होने के कारण ज्यादातर लोग उन्हें खरीद नहीं पाते। जीएमसी के बारे में जितना कम कहा जाए, उतना ही बेहतर है। उसकी हालत बहुत ज्यादा बुरी है। पूरे राज्य में एक ही जीएमसी है, इसलिए काणकोण से वहां पहुंचने में दो घंटे लगते हैं। अगर कोई इमरजेंसी हो जाए, तो दो घंटे में तो मरीज की जान ही चली जाएगी। पोंडा से वहां पहुंचने में एक घंटा लगता है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इसके अलावा साउथ गोवा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल है, जहां 193 पद खाली पड़े हैं। वहां कई स्पेशलिस्ट नहीं हैं और दवाइयों की बहुत ज्यादा कमी है। वह अस्पताल पूरी तरह से ठप पड़ा है। पोंडा के आईडी अस्पताल में तो बुनियादी मेडिकल उपकरण ही गायब हैं। वह पर्याप्त रूप से सुसज्जित नहीं है। वहां न तो सीटी स्कैन है और न ही एमआरआई है। वहां आठ लिफ्ट हैं, जिनमें से सात खराब हैं। आईडी अस्पताल पोंडा ज्यादातर सिर्फ एक रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है। जितने भी मरीज आते हैं, उन्हें जीएमसी रेफर कर दिया जाता है। वहां स्पेशलिस्ट नहीं हैं, स्टाफ की भारी कमी है और बहुत सारे डॉक्टर नहीं हैं, जबकि इस अस्पताल को बने 12 साल हो चुके हैं। इस तरह गोवा का पूरा सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम पूरी तरह से ढह चुका है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 90 फीसद लोगों को यह नहीं पता कि अगर उनके घर में कोई बीमार हो जाए तो वे कहां जाएं। लोगों को राहत देने के लिए सरकार ने दीनदयाल स्वास्थ्य सेवा योजना निकाली थी, ताकि अगर किसी को सरकारी अस्पताल में ठीक से इलाज न मिले, तो वह प्राइवेट अस्पताल में जाकर इलाज करा सके। इस योजना की राशि अब बढ़ाकर, तीन लोगों के परिवार के लिए पूरे साल का 4 लाख रुपए का इंश्योरेंस कर दिया गया है। अगर परिवार में चार या उससे अधिक सदस्य हैं, तो यह राशि 6 लाख रुपए है। लेकिन आज के समय में 4 लाख और 6 लाख रुपए कुछ भी नहीं होते।

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि लोगों को यह जानकर हैरानी होगी कि इस योजना का कवरेज बढ़ने के बजाय घट गया है। साल 2022-23 में 2.95 लाख परिवारों को कार्ड जारी किए गए थे, लेकिन 2025-26 आते-आते यह आंकड़ा गिरकर 1.81 लाख रह गया है। करीब सवा लाख लोगों ने अपने कार्ड इस्तेमाल करना बंद कर दिया है। इससे साफ जाहिर है कि लोगों को इस योजना का कोई फायदा नहीं मिल रहा है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आदर्श स्थिति तो यह है कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावी, कुशल और काम करने लायक बनाया जाए। लेकिन इसमें समय लगेगा और जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। इसलिए हमने पंजाब में यह किया है कि हर परिवार को 10-10 लाख रुपए का इंश्योरेंस कवर दिया है। इसके लिए कोई आय सीमा या कोई अन्य योग्यता मानदंड नहीं है। बस व्यक्ति पंजाब का निवासी होना चाहिए।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गोवा में जहां 447 बीमारियां कवर की जाती हैं, वहीं पंजाब में 2350 बीमारियों और प्रक्रियाओं को कवर किया गया है। यह गोवा से छह गुना ज्यादा है। लगभग सब कुछ कवर किया गया है और अगर कोई बीमारी छूट जाती है, तो हम उसे भी जोड़ देते हैं। हमारी सरकार लोगों की मांगों और जरूरतों के प्रति बहुत संवेदनशील है। पंजाब में लगभग सारे अस्पताल (सरकारी और प्राइवेट) इसमें शामिल हैं। अस्पतालों को 15 दिन के अंदर भुगतान हो जाता है और उन्हें आज के मार्केट रेट के हिसाब से पैसा दिया जाता है। इस योजना को लागू हुए अभी 6 महीने भी नहीं हुए हैं और हमें लोगों से बहुत ही शानदार फीडबैक मिल रहा है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इसमें कोई राजनीति नहीं है, बस लोगों का फायदा होना चाहिए। इसलिए आज हम गोवा के मुख्यमंत्री से अपील करते हैं कि वे पंजाब की अच्छी नीतियों को अपनाएं और गोवा में भी 10 लाख रुपए के इंश्योरेंस वाली यह योजना लागू करें। अगर गोवा में यह योजना लागू होती है, तो मणिपाल हॉस्पिटल, विक्टर हॉस्पिटल, हेल्थवे, गैलेक्सी और रेडकर हॉस्पिटल जैसे प्राइवेट अस्पताल आम जनता की पहुंच में आ जाएंगे। लोगों को जीएमसी पहुंचने के लिए दो-दो घंटे का सफर नहीं करना पड़ेगा। 

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि ये वे अस्पताल हैं जहां सबसे अमीर और राजनीतिक रूप से रसूखदार लोग अपना इलाज कराते हैं। अगर यह योजना लागू हुई तो ये अस्पताल गोवा के सबसे गरीब व्यक्ति की पहुंच में भी आ जाएंगे और सबको एक जैसा इलाज मिलने लगेगा। गोवा के लोगों की तरफ से हमारी गोवा के मुख्यमंत्री से अपील है कि पंजाब की “आप” सरकार वाली 10 लाख रुपए की इंश्योरेंस योजना गोवा में भी लागू की जाए।

इन चार कारणों से गोवा में दीन दयाल स्वास्थ्य सेवा योजना फेल-

  1. कम राशि:* इसकी राशि बहुत कम है। आजकल अगर किसी को हार्ट अटैक या कैंसर जैसी कोई गंभीर बीमारी हो जाए, तो एक ही बीमारी के इलाज में 4 लाख से ज्यादा का खर्च आ जाता है।
  2. बीमारियों का कम कवरेज:* इस योजना के तहत कवर की जाने वाली बीमारियों और प्रक्रियाओं की संख्या बहुत कम है, यह सिर्फ 447 है। इसमें मोतियाबिंद की सर्जरी भी शामिल नहीं है (मोतियाबिंद का ऑपरेशन तो हमारे विधायक वेंजी वीगास वैसे ही करवा देते हैं)। इसके अलावा इसमें पीईटी स्कैन शामिल नहीं है, जो कैंसर की जांच के लिए जरूरी होता है। कैंसर की कई सारी थेरेपी और प्रक्रियाएं इसमें शामिल नहीं हैं। इसमें इतनी कम बीमारियां कवर हैं कि यह पूरी योजना गोवा के ज्यादातर लोगों के लिए अप्रासंगिक और व्यर्थ हो गई है।
  3.   भुगतान में देरी:* सरकार अस्पतालों को इलाज का पैसा समय पर नहीं देती है। कई-कई महीनों तक पैसा पेंडिंग रहता है, जिसकी वजह से अस्पताल डीडीएसएसवाई कार्ड को स्वीकार करना ही बंद कर देते हैं। लोग कार्ड लेकर जाते हैं, लेकिन अस्पताल उस कार्ड पर इलाज नहीं करते।
  4.  पुरानी दरें:* सरकार जिस दर पर अस्पतालों को भुगतान करती है, वे दरें 2016 में तय की गई थीं। ज्यादातर अस्पतालों को लगता है कि ये दरें उनके लिए लाभदायक नहीं हैं, इसलिए वे कोई न कोई बहाना बनाकर इस कार्ड को स्वीकार नहीं करते।